रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।
सीता सहित अनुज प्रभु आवत।।
प्रभु श्री राम भारत के प्राण हैं।
उनका पथ ही हमारी नीति है, उनका आदर्श ही हमारी दिशा है।
जय जय सियाराम!
अरुण नयन राजीव सुवेशं।
सीता नयन चकोर निशेशं।।
हर हृदि मानस बाल मरालं।
नौमि राम उर बाहु विशालं।।

‘दीपोत्सव-2025’ की दिव्य आभा से दीप्त श्री अयोध्या धाम में श्री राम दरबार के प्रतीक स्वरूप का तिलक लगाकर वंदन-अभिनंदन किया।

आज श्री अयोध्या धाम से विश्वभर में भारतीय संस्कृति की आत्मा, सनातन धर्म की श्रद्धा और रामराज्य के आदर्शों का दिव्य संदेश प्रसारित हो रहा है।

‘राम भक्तों’ की आस्था के केंद्र एवं ‘सूर्यवंश की राजधानी’ श्री अयोध्या धाम आज असंख्य दीपों के निर्मल ज्योति पुंज की अलौकिक आभा से दीप्त है।

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि असंख्य दीपशिखाओं के प्रकाश से संपूर्ण जगत आलोकित हो एवं प्रत्येक हृदय में सुख, शांति व समृद्धि का नव-संचार हो।

‘राममय’ श्री अयोध्या धाम में आज 26 लाख 17 हजार 215 दीपों की जगमगाती ज्योति ने विश्व-रिकॉर्ड रचते हुए सनातन संस्कृति के अमर तेज को पुनः प्रज्वलित किया है।

‘दीपोत्सव-2025’ श्रद्धा, साधना और संकल्प का वह उत्सव है, जहां 2,128 वेदाचार्यों, अर्चकों और साधकों ने एक साथ माँ सरयू की आरती कर धर्म और संस्कृति का अनुपम कीर्तिमान रचा है।

पूज्य संत जन, धर्माचार्यों और असंख्य रामभक्तों के सामूहिक प्रयासों से साकार यह दृश्य भारत की आत्मा का आलोक है।
आज पूरा विश्व एक स्वर में कह रहा है…

जय जय सियाराम!





