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UP के मदरसों तक पहुंची एटीएस और एनआईए की जांच

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दिल्ली विस्फोट की तह तक जाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां एड़ी से चोटी तक का जोर लगा रही हैं। इसी के चलते छोटी से छोटी सूचना को लेकर बड़े स्तर पर कवायद की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां विस्फोट के बाद पकड़े गए डॉक्टर गैंग से लगातार पूछताछ कर रही हैं और उनसे मिलने वाली हर सूचना पर जद्दोजहद कर रही हैं। जांच की इसी कड़ी में यूपी एटीएस ने कई जिलों के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों और मौलवी की जानकारी मांगी है कानपुर, फतेहपुर में एटीएस भी यह जानकारी जुटा रही है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि एनआईए और एटीएस की जांच अब मदरसों तक भी पहुंच गई है। अल्पसंख्यक विभाग से इनका पूरा ब्यौरा मांगा गया है सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली है कि कानपुर के आउटर इलाकों और मदरसों में रहने वाले कुछ कट्टरपंथियों से डॉ. शाहीन सईद, उसके भाई डॉ. परवेज और सहारनपुर से पकड़े गए डॉ. आदिल ने संपर्क किया था जिसके चलते मदरसों में पढ़ने और पढ़ाने वालों को पूरा डाटा मोबाइल नंबर के साथ लिया जा रहा है सूत्र बताते हैं कि धार्मिक सभाओं के आयोजन के दौरान जो गाड़ियां कानपुर आईं थी उनके नंबर सुरक्षा एजेंसियों को मिल गए हैं। यह गाड़ियां बागपत, मेरठ और सहारनपुर की निकली हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने इनके फुटेज भी जुटा लिए हैं। सूत्रों की माने तो इनमें से एक सहारनपुर का डॉ. आदिल भी था। सूत्र बता रहे हैं कि धार्मिक सभा के दौरान के वीडियो भी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे हैं। जिनमें न सिर्फ लोकल स्लीपर सेल्स बल्कि कानपुर के नामचीन कई लोग शिरकत करते हुए दिखाई दिए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. शाहीन और डॉ. आरिफ के मोबाइल पर कई लोगों के नंबर सेव मिले हैं। जिसके बाद एजेंसियां अब सीधे तौर पर इन लोगों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही हैं। कुछ लोगों से पूछताछ की भी जा चुकी है।

फंडिंग करने वाले रडार पर

सूत्र बता रहे हैं कि दिल्ली विस्फोट के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी पड़ताल सबसे पहले इसी दिशा में की, आखिर इतनी बड़ी तादाद में विस्फोट आया कहां से। इसके पीछे बड़ी फंडिंग की जानकारी हाथ लगी है। कानपुर में भी कुछ लोगों ने दान के तौर पर यह राशि डाक्टर्स गैंग को मुहैया कराई थी। दान देने वालों के लिंक एजेंसियों को मिले हैं। जल्द ही इनके गिरेबां तक एजेंसियों के हाथ पहुंचेंगे।

आदिल, परवेज और शाहीन को रिमांड पर लेने की तैयारी
कानपुर समेत यूपी के कई जिलों में एजेंसियों की ऑपरेशन विंग काम कर रही है। किसी भी एजेंसी का काम प्रभावित न हो और ज्यादा से ज्यादा इंफॉर्मेशन कलेक्ट हो, इसके लिए कम्युनिकेशन डेस्क बनाई गई है। कानपुर में यह कम्युनिकेशन डेस्क कैंट एरिया में होने की जानकारी सूत्रों ने दी हैं। जहां से सुरक्षा एजेंसी के मुख्यालय और ऑपरेशन विंग के इंचार्ज की ऑनलाइन मीटिंग में पूरे दिन का अपडेट लिया जा रहा है। ऑपरेशन विंग का काम खत्म होते ही एजेंसियां अलग-अलग आदिल, परवेज और शाहीन की रिमांड के लिए प्रयास करेंगी।

रिमांड के बाद चक्रवार होगी पूछताछ

अगर डाक्टर्स गैंग को रिमांड मिलती है तो तीन चक्रों में उनसे पूछताछ का प्लान बनाया गया है। पहले चक्र में हर बिंदु पर अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन की जाएगी। पूछताछ का डेटा भी मेंटेन किया जाएगा। दूसरे चक्र में दो-दो लोगों को आमने सामने बैठाकर सवाल जवाब होंगे। तीसरे चक्र में एक साथ कई अधिकारी तीनों आरोपियों से आतंक के नेक्सस की जानकारी करने की कोशिश करेंगे।

सूत्र बताते हैं कि आतंक से जुड़े गिरफ्तार डॉक्टर्स व्हाइट कॉलर टेररिस्ट की कमान संभाले थे। सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार डॉक्टर्स गैंग के इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स से कानपुर से संबंधित बड़ी जानकारी मिली है। हालांकि जानकारी क्या है, इसे साझा करने से सूत्रों ने मना कर दिया।

सात साल में कई करोड़ का लेनदेन

डॉ. शाहीन, डॉ. आरिफ, डॉ. आदिल और डॉ. परवेज के बैंक खातों की जांच करने पर एजेंसियों को बड़ी जानकारी हाथ लगी है। सूत्र बताते हैं कि चारों के खातों में सात साल के अंदर 40 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन मिला है जबकि इतनी ही रकम छोटे-छोटे अमाउंट में आई-गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह लेनदेन इन खातों में 6 नवंबर तक हुआ है। 6 नवंबर को कई बार में कई लाख रुपये की रकम निकाले जाने की बात बतायी जा रही है। जिसके बाद एनआईए और एटीएस की टीमें इस लेनदेन का पता लगाने के लिए बैंकों में पूछताछ कर रही हैं।

कानपुर के बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ हुई है। जो जानकारी मिली है उसमें कुछ लोगों को पूछताछ के लिए लखनऊ ले जाने की बात सूत्र बता रहे हैं। दिल्ली धमाके के बाद से अब तक कानपुर के रहने वाले और इस नेक्सस से जुड़े लगभग 150 लोगों से जांच एजेंसियां पूछताछ कर चुकी हैं। जिन खातों से लेनदेन मिला है उन्हें फ्रीज कराया जा रहा है।

रावतपुर में संदिग्धों की फोटो दिखाकर की पूछताछ
बुधवार को एटीएस की एक टीम रावतपुर के संवेदनशील इलाके में पहुंची और कुछ संदिग्ध लोगों की फोटो दिखाकर उनकी जानकारी कलेक्ट की। कानपुर में मदरसा के कुछ छात्रों की भूमिका को लेकर भी पड़ताल तेज कर दी गई है। उधर, निजी मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे जम्मू-कश्मीर मूल के निवासी डॉक्टरों और छात्रों की छानबीन भी चल रही है।

फतेहपुर में एटीएस ने मदरसों की जानकारी मांगी
वहीं, फतेहपुर में एटीएस ने मदरसों की जांच शुरू कर दी है। यूपी एटीएस की प्रयागराज यूनिट ने जिले में संचालित मान्यता प्राप्त व गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। एटीएस का पत्र मिलने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इसकी कवायद शुरू कर दिया है।

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